लियोपोल्ड मोज़ार्ट ने अपने बेटे को 3 साल की उम्र से पियानो सिखाना शुरू किया। यूरोप के राज दरबारों में उसे प्रदर्शन के लिए ले जाया गया। बाहर से यह सफलता लगती थी।
लेकिन भीतर क्या हो रहा था?
वोल्फगैंग को कभी चुनने का मौका नहीं मिला — न दोस्त, न खेल, न बचपन। उनकी जिंदगी एक कार्यक्रम की तरह थी जो पिता ने लिखी थी।
- 35 साल की उम्र में मोज़ार्ट की मृत्यु हुई — गरीबी और थकान में।
- पिता से उनके आखिरी वर्षों में संबंध टूट चुके थे।
- उन्होंने खुद लिखा था कि वो संगीत से प्रेम करते हैं, लेकिन उसका बोझ उठाते-उठाते थक गए हैं।
माता-पिता के लिए यहाँ एक ठोस सवाल है — क्या आप बच्चे की प्रतिभा को उसकी पहचान बना रहे हैं, या उसे एक इंसान की तरह देख रहे हैं जिसकी अपनी पसंद है?
मोज़ार्ट का संगीत आज भी जीवित है। लेकिन उनकी खुशी का कोई रिकॉर्ड नहीं मिलता। यह अंतर ध्यान देने लायक है।