जब कोई बच्चा कहता है कि मुझे संगीत नहीं सीखना, तो माता-पिता की पहली प्रतिक्रिया अक्सर चिंता होती है। लेकिन इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं जहाँ एक विराम ने रचनात्मकता को नया मोड़ दिया।
छह ऐसे कलाकार जो बीच राह रुके
- शुमान ने पियानो छोड़ा और रचना की तरफ मुड़े। हाथ की चोट ने उन्हें रोका, लेकिन संगीत नहीं छूटा।
- रवींद्रनाथ टैगोर ने कई वर्षों तक संगीत को गौण रखा। साहित्य में डूबे रहे, फिर रबींद्र संगीत का पूरा संसार बनाया।
- सत्यजित रे ने पहले संगीत में रुचि दिखाई, फिर सिनेमा चुना। लेकिन अपनी फिल्मों का संगीत खुद रचा।
- गुलाम अली खाँ ने युवावस्था में कई बार निराश होकर अभ्यास बंद किया। बाद में वो ठुमरी के सबसे बड़े नामों में गिने गए।
- सुब्रमण्यम के पिता ने उन्हें वायलिन और पढ़ाई में से एक चुनने को कहा। उन्होंने दोनों चुने — बाद में।
- एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी को शुरुआती दौर में मंच से हटा दिया गया था। वो वापस आईं और भारत रत्न बनीं।
हर रुकावट अंत नहीं होती। लेकिन हर रुकावट में यह जरूर देखना चाहिए कि बच्चा थका है या ऊब गया है — दोनों के लिए जवाब अलग होता है।